ऋग्वेद (मंडल 1)
इ॒दं श्रेष्ठं॒ ज्योति॑षां॒ ज्योति॒रागा॑च्चि॒त्रः प्र॑के॒तो अ॑जनिष्ट॒ विभ्वा॑ । यथा॒ प्रसू॑ता सवि॒तुः स॒वाय॑ँ ए॒वा रात्र्यु॒षसे॒ योनि॑मारैक् ॥ (१)
द्योतमान ग्रहनक्षत्रादि में श्रेष्ठ ज्योति उषा आई. इसकी बहुरंगी एवं विश्व को प्रकाशित करने वाली रश्मियां सभी जगह फैल गई. जिस प्रकार रात्रि सूर्य से उत्पन्न होती है, उसी प्रकार उषा का उत्पत्ति स्थान रात्रि है. (१)
Usha, the best light in the demotting planetakshatradi, spread all over the place. Its multicolored and illuminating rays that illuminated the world spread all over the place. Just as night originates from the sun, so the place of origin of Usha is night. (1)
ऋग्वेद (मंडल 1)
रुश॑द्वत्सा॒ रुश॑ती श्वे॒त्यागा॒दारै॑गु कृ॒ष्णा सद॑नान्यस्याः । स॒मा॒नब॑न्धू अ॒मृते॑ अनू॒ची द्यावा॒ वर्णं॑ चरत आमिना॒ने ॥ (२)
सूर्य की माता, तेजस्विनी एवं श्वेतवर्ण वाली उषा आई है. कृष्णवर्णा रात्रि ने उसे अपना स्थान दे दिया है. यद्यपि ये दोनों एक ही सूर्य से संबंधित एवं मरणरहिता हैं, तथापि एक- दूसरी के पीछे आती हैं एवं एक-दूसरे का रूप नष्ट करती हुई आकाश में विचरण करती हैं. (२)
The mother of the sun, Tejaswini and the white-coloured Usha have come. Krishnavarna night has given her her place. Although they are both related to the same sun and are non-moribund, they follow each other and wander in the sky destroying each other's form. (2)
ऋग्वेद (मंडल 1)
स॒मा॒नो अध्वा॒ स्वस्रो॑रन॒न्तस्तम॒न्यान्या॑ चरतो दे॒वशि॑ष्टे । न मे॑थेते॒ न त॑स्थतुः सु॒मेके॒ नक्तो॒षासा॒ सम॑नसा॒ विरू॑पे ॥ (३)
इन दोनों बहिनों का अनंत गमनमार्ग एक ही है, जिस पर सूर्य द्वारा निर्देश पाकर ये एक-एक करके चलती हैं. वे सुंदर जन्मदात्री एवं परस्पर भिन्न रूप वाली होकर एकमत को प्राप्त करके आपस में किसी की हिंसा नहीं करतीं तथा कभी स्थिर नहीं रहतीं. (३)
The two sisters have the same infinite path of movement, on which they walk one by one after receiving instructions from the sun. They are beautiful and mutually different, and do not violence to anyone by achieving one's consensus and are never steadfast. (3)
ऋग्वेद (मंडल 1)
भास्व॑ती ने॒त्री सू॒नृता॑ना॒मचे॑ति चि॒त्रा वि दुरो॑ न आवः । प्रार्प्या॒ जग॒द्व्यु॑ नो रा॒यो अ॑ख्यदु॒षा अ॑जीग॒र्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ॥ (४)
हम प्रकाशसंपन्न एवं वाणियों की नेत्री उषा को जानते हैं. विचित्र उषा ने हमारे लिए अंधकार के बंद द्वार खोल दिए हैं, सारे संसार को प्रकाशित करके हमें धन दिए हैं एवं समस्त लोक को प्रकाशित किया है. (४)
We know Usha, the leader of the light and the vanis. The strange Usha has opened the closed doors of darkness for us, has illuminated the whole world, given us wealth and illuminated all the people. (4)
ऋग्वेद (मंडल 1)
जि॒ह्म॒श्ये॒३॒॑ चरि॑तवे म॒घोन्या॑भो॒गय॑ इ॒ष्टये॑ रा॒य उ॑ त्वम् । द॒भ्रं पश्य॑द्भ्य उर्वि॒या वि॒चक्ष॑ उ॒षा अ॑जीग॒र्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ॥ (५)
उषा टेढ़े सोए हुए लोगों में कुछ को अपने अपेक्षित स्थान को जाने के लिए, कुछ को भोग के लिए, कुछ को यज्ञ के लिए एवं कुछ को धन के लिए जगाती है. यह अंधकार के कारण थोड़ा देखने वालों के विशिष्ट प्रकाश के लिए सारे भुवनों को प्रकाशित करती है. (५)
Usha wakes up some of the crooked sleeping people to go to their desired place, some for enjoyment, some for yajna and some for money. It illuminates all the eyebrows for the specific light of the little beholders due to darkness. (5)
ऋग्वेद (मंडल 1)
क्ष॒त्राय॑ त्वं॒ श्रव॑से त्वं मही॒या इ॒ष्टये॑ त्व॒मर्थ॑मिव त्वमि॒त्यै । विस॑दृशा जीवि॒ताभि॑प्र॒चक्ष॑ उ॒षा अ॑जीग॒र्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ॥ (६)
उषा किसी को धन के लिए, किसी को अन्न के लिए, किसी को महायज्ञ के लिए एवं किसी को अभीष्ट वस्तु प्राप्ति के लिए जगाती है. वह नानारूप जीविकाओं के निमित्त समस्त विश्व को प्रकाशित करती है. (६)
Usha wakes someone up for money, someone for food, someone for mahayagya and someone for getting the desired thing. She illuminates the whole world for the sake of various livelihoods. (6)
ऋग्वेद (मंडल 1)
ए॒षा दि॒वो दु॑हि॒ता प्रत्य॑दर्शि व्यु॒च्छन्ती॑ युव॒तिः शु॒क्रवा॑साः । विश्व॒स्येशा॑ना॒ पार्थि॑वस्य॒ वस्व॒ उषो॑ अ॒द्येह सु॑भगे॒ व्यु॑च्छ ॥ (७)
< आकाश की पुत्री यह उषा मनुष्यों द्वारा नित्य यौवना, श्वैतवसना, तमोविनाशिनी एवं समस्त संपत्तियों की अधीश्वरी के रूप में देखी गई है. हे शोभनधनसंपन्न उषा! तुम आज यहां अंधकार नष्ट करो. (७)
This usha, the daughter of < akash, has been seen by humans as nitya yuvavana, shvaitvasana, tamovinasini and the adhiswari of all the possessions. O glorious Usha! You destroy the darkness here today. (7)
ऋग्वेद (मंडल 1)
प॒रा॒य॒ती॒नामन्वे॑ति॒ पाथ॑ आयती॒नां प्र॑थ॒मा शश्व॑तीनाम् । व्यु॒च्छन्ती॑ जी॒वमु॑दी॒रय॑न्त्यु॒षा मृ॒तं कं च॒न बो॒धय॑न्ती ॥ (८)
अतीत उषाओं के मार्ग का अनुवर्तन वर्तमान उषा करती है. यह आने वाली अगणित उषाओं की आदि है. यह अंधकार को मिटाती, प्राणियों को जागृत करती एवं निद्रा में मृतवत् बने लोगों को चेतन बनाती है. (८)
The present Usha follows the path of past ushas. This is the beginning of countless ushas to come. It removes darkness, awakens beings and makes people who are dead in sleep conscious. (8)