ऋग्वेद (मंडल 1)
भास्व॑ती ने॒त्री सू॒नृता॑ना॒मचे॑ति चि॒त्रा वि दुरो॑ न आवः । प्रार्प्या॒ जग॒द्व्यु॑ नो रा॒यो अ॑ख्यदु॒षा अ॑जीग॒र्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ॥ (४)
हम प्रकाशसंपन्न एवं वाणियों की नेत्री उषा को जानते हैं. विचित्र उषा ने हमारे लिए अंधकार के बंद द्वार खोल दिए हैं, सारे संसार को प्रकाशित करके हमें धन दिए हैं एवं समस्त लोक को प्रकाशित किया है. (४)
We know Usha, the leader of the light and the vanis. The strange Usha has opened the closed doors of darkness for us, has illuminated the whole world, given us wealth and illuminated all the people. (4)