ऋग्वेद (मंडल 1)
स्यूम॑ना वा॒च उदि॑यर्ति॒ वह्निः॒ स्तवा॑नो रे॒भ उ॒षसो॑ विभा॒तीः । अ॒द्या तदु॑च्छ गृण॒ते म॑घोन्य॒स्मे आयु॒र्नि दि॑दीहि प्र॒जाव॑त् ॥ (१७)
स्तुतियों को वहन करने वाला स्तोता प्रकाशमान उषा की स्तुति करता हुआ सुव्यवस्थित वेद वचन बोलता है. हे धनस्वामिनी उषा! इसलिए आज इस स्तोता का रात्रि संबंधी अंधकार मिटाओ तथा हमें प्रजायुक्त धन दो. (१७)
The stota who carries the praises speaks the word of the streamlined Vedas praising the illuminating Usha. O dhanswamini usha! So, remove the nightly darkness of this hymn today and give us the money of the people. (17)