ऋग्वेद (मंडल 1)
उप॑ ते॒ स्तोमा॑न्पशु॒पा इ॒वाक॑रं॒ रास्वा॑ पितर्मरुतां सु॒म्नम॒स्मे । भ॒द्रा हि ते॑ सुम॒तिर्मृ॑ळ॒यत्त॒माथा॑ व॒यमव॒ इत्ते॑ वृणीमहे ॥ (९)
हे मरुत्पिता! जिस प्रकार गोपाल दिन भर चराने के बाद पशु अधिपति को लौटा देता है, उसी प्रकार मैं तुम्हारा स्तोत्र तुम्हें लौटा रहा हूं. हमें सुख दो. तुम्हारी कल्याणी बुद्धि परम रक्षक एवं सुखकारिणी है, इसी कारण हम तुमसे रक्षा की याचना करते हैं. (९)
O God, Marut! Just as gopal (caretaker) returns the animal to the owner after grazing all day long, so I am returning your sources to you. Give us happiness. Your welfare wisdom is the ultimate protector and the pleasure, that is why we pray you to be protected. (9)