हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.117.23

मंडल 1 → सूक्त 117 → श्लोक 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 117
सदा॑ कवी सुम॒तिमा च॑के वां॒ विश्वा॒ धियो॑ अश्विना॒ प्राव॑तं मे । अ॒स्मे र॒यिं ना॑सत्या बृ॒हन्त॑मपत्य॒साचं॒ श्रुत्यं॑ रराथाम् ॥ (२३)
हे क्रांतदर्शी अश्चिनीकुमारो! मैं तुम्हारी कल्याणकारिणी अनुग्रह बुद्धि की सदा प्रार्थना करता हूं. तुम मेरे सभी कर्मो की रक्षा करो. हे दर्शनीयो! हमें महान्‌, संतानयुक्त एवं प्रशंसनीय धन दो. (२३)
This is the revolutionary aschinikumaro! I pray forever for your welfare grace. You protect all my deeds. O you see! Give us great, childlike and admirable wealth. (23)