ऋग्वेद (मंडल 1)
यु॒वं न॑रा स्तुव॒ते कृ॑ष्णि॒याय॑ विष्णा॒प्वं॑ ददथु॒र्विश्व॑काय । घोषा॑यै चित्पितृ॒षदे॑ दुरो॒णे पतिं॒ जूर्य॑न्त्या अश्विनावदत्तम् ॥ (७)
हे नेताओ! कृष्ण के पुत्र विश्वकाय ने तुम लोगों की स्तुति की तो तुमने उसके खोए हुए पुत्र विष्णायु को लाकर दे दिया. हे अश्चिनीकुमारो! कुष्ठ रोग के कारण पति को प्राप्त न करके अपने पिता के घर बैठी हुई एवं वृद्धावस्था को प्राप्त घोषा को तुमने पति प्रदान किया. (७)
Hey leaders! Krishna's son Vishwakaya praised you, so you brought his lost son Vishnuyu and gave it to him. O aschinikumaro! You have given a husband to your father's house and who is sitting in your father's house and attaining old age, without getting a husband due to leprosy. (7)