ऋग्वेद (मंडल 1)
आ वां॒ रथो॑ अश्विना श्ये॒नप॑त्वा सुमृळी॒कः स्ववा॑ँ यात्व॒र्वाङ् । यो मर्त्य॑स्य॒ मन॑सो॒ जवी॑यान्त्रिवन्धु॒रो वृ॑षणा॒ वात॑रंहाः ॥ (१)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम्हारा घोड़ों से चलने वाला सुखयुक्त एवं धनयुक्त रथ हमारे सामने आए. हे कामवर्षको! वह मानव मन के समान वेगवानू त्रिर्बधुर एवं वायु के समान तीव्रगामी है. (१)
O aschinikumaro! Your happy and rich horse-driven chariot came before us. O work years! It is as fast as the human mind and as fast as the wind. (1)
ऋग्वेद (मंडल 1)
त्रि॒व॒न्धु॒रेण॑ त्रि॒वृता॒ रथे॑न त्रिच॒क्रेण॑ सु॒वृता या॑तम॒र्वाक् । पिन्व॑तं॒ गा जिन्व॑त॒मर्व॑तो नो व॒र्धय॑तमश्विना वी॒रम॒स्मे ॥ (२)
हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने त्रिबंधुर, तीन पहियों वाले, तीन लोकों में चलने वाले एवं शोभन गति वाले रथ द्वारा हमारे समीप आओ. हमारी गायों को दुधारू, हमारे घोड़ों को प्रसन्न एवं हमारे पुत्रादि को वृद्धियुक्त करो. (२)
O Ashwinikumaro! Come to us by your tribandhur, three-wheeled, three-loka-treading, and a beautifully moving chariot. Make our cows milch, our horses happy, and our sons grow. (2)
ऋग्वेद (मंडल 1)
प्र॒वद्या॑मना सु॒वृता॒ रथे॑न॒ दस्रा॑वि॒मं शृ॑णुतं॒ श्लोक॒मद्रेः॑ । किम॒ङ्ग वां॒ प्रत्यव॑र्तिं॒ गमि॑ष्ठा॒हुर्विप्रा॑सो अश्विना पुरा॒जाः ॥ (३)
हे दर्शनीय अश्चिनीकुमारो! अपने शीघ्रगामी एवं शोभन आकृति वाले रथ द्वारा आकर आदर करने वाले स्तोता की वाणी सुनो. कया भूतकाल में उत्पन्न मेधावियों ने तुम्हें स्तोताओं की दरिद्रता मिटाने के लिए जाने वाला नहीं कहा था. (३)
O magnificent aschinikumaro! Listen to the voice of the revered hymn who comes through your fast-moving and adorned chariot. The brilliant people born in the past did not tell you to go to eradicate the poverty of the stoetas. (3)
ऋग्वेद (मंडल 1)
आ वां॑ श्ये॒नासो॑ अश्विना वहन्तु॒ रथे॑ यु॒क्तास॑ आ॒शवः॑ पतं॒गाः । ये अ॒प्तुरो॑ दि॒व्यासो॒ न गृध्रा॑ अ॒भि प्रयो॑ नासत्या॒ वह॑न्ति ॥ (४)
हे अश्विनीकुमारो! रथ में जुड़े हुए सर्वत्र गतिशील, उछलने में समर्थ एवं प्रशंसनीय गमन वाले घोड़े तुम्हें लावें. हे सत्यस्वरूपो! जल के समान अथवा आकाशचारी गृध्र पक्षी के समान शीघ्र गति वाले घोड़े तुम्हें हव्य अन्न के सामने लाते हैं. (४)
O Ashwinikumaro! May the horses that are connected in the chariot move everywhere, capable of bouncing and admirable movement bring you. O true ones! Fast-moving horses like water or like a sky-chilling dark bird bring you in front of the human grain. (4)
ऋग्वेद (मंडल 1)
आ वां॒ रथं॑ युव॒तिस्ति॑ष्ठ॒दत्र॑ जु॒ष्ट्वी न॑रा दुहि॒ता सूर्य॑स्य । परि॑ वा॒मश्वा॒ वपु॑षः पतं॒गा वयो॑ वहन्त्वरु॒षा अ॒भीके॑ ॥ (५)
हे नेताओ! सूर्य की युवती कन्या प्रसन्न होकर तुम्हारे रथ पर चढ़ी थी. तुम्हारे सुंदर, उछलने में समर्थ, गतिशील एवं तेजस्वी घोड़े तुम्हें तुम्हारे घर के पास ले जावें. (५)
Hey leaders! The young woman of the sun had climbed on your chariot with delight. May your beautiful, bouncy, dynamic and stunning horses take you to your house. (5)
ऋग्वेद (मंडल 1)
उद्वन्द॑नमैरतं दं॒सना॑भि॒रुद्रे॒भं द॑स्रा वृषणा॒ शची॑भिः । निष्टौ॒ग्र्यं पा॑रयथः समु॒द्रात्पुन॒श्च्यवा॑नं चक्रथु॒र्युवा॑नम् ॥ (६)
हे दर्शनीय एवं कामवर्षको! तुमने वंदन ऋषि को कुएं से निकाला था. तुग्र के पुत्र भुज्यु को सागर से पार किया तथा च्यवन ऋषि को दोबारा युवक बनाया. (६)
O you who are visible and workable! You took out the sage Vandan from the well. He crossed bhuju, the son of Tugrah, through the sea and made the sage Chyavan a young man again. (6)
ऋग्वेद (मंडल 1)
यु॒वमत्र॒येऽव॑नीताय त॒प्तमूर्ज॑मो॒मान॑मश्विनावधत्तम् । यु॒वं कण्वा॒यापि॑रिप्ताय॒ चक्षुः॒ प्रत्य॑धत्तं सुष्टु॒तिं जु॑जुषा॒णा ॥ (७)
हे अश्विनीकुमारो! तुमने शतद्वार पीड़ागृह में बंद अत्रि को बचाने के लिए अग्नि को बुझाया एवं उन्हें सुखकारी अन्न दिया. तुमने शोभन स्तुति स्वीकार करके अंधेरे में पड़े कण्व ऋषि को नेत्र दिए. (७)
O Ashwinikumaro! You extinguished the fire to save the Atri, who was locked up in the Shatdwara tormentorium, and gave them a pleasant meal. You accepted the praise and gave eyes to the sage Kanva lying in the dark. (7)
ऋग्वेद (मंडल 1)
यु॒वं धे॒नुं श॒यवे॑ नाधि॒तायापि॑न्वतमश्विना पू॒र्व्याय॑ । अमु॑ञ्चतं॒ वर्ति॑का॒मंह॑सो॒ निः प्रति॒ जङ्घां॑ वि॒श्पला॑या अधत्तम् ॥ (८)
हे अश्चिनीकुमारो! तुमने अपने प्राचीन याचक शंयु ऋषि के लिए गाय को दुधारू किया था. तुमने वर्तिका को पाप से बचाया एवं विश्पला को दूसरी जंघा लगाई थी. (८)
O aschinikumaro! You had milched the cow for your ancient yachak shanyu sage. You saved Vartika from sin and gave Vishpala another thigh. (8)