हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.118.11

मंडल 1 → सूक्त 118 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 118
आ श्ये॒नस्य॒ जव॑सा॒ नूत॑नेना॒स्मे या॑तं नासत्या स॒जोषाः॑ । हवे॒ हि वा॑मश्विना रा॒तह॑व्यः शश्वत्त॒माया॑ उ॒षसो॒ व्यु॑ष्टौ ॥ (११)
हे सत्यस्वरूप अश्चिनीकुमारो! तुम समान प्रीतयुक्त एवं प्रशंसनीय गति वाले घोड़े के नए वेग से युक्त होकर हमारे समीप आओ. हम तुम्हें देने योग्य हवि लेकर नित्य उषा के उदय काल में बुलाते हैं. (११)
O satyaswaroop aschinikumaro! Come to us with the new velocity of a horse with the same love and admirable speed. We call you to the rising period of Usha with a suitable gift. (11)