ऋग्वेद (मंडल 1)
यु॒वं पे॒दवे॑ पुरु॒वार॑मश्विना स्पृ॒धां श्वे॒तं त॑रु॒तारं॑ दुवस्यथः । शर्यै॑र॒भिद्युं॒ पृत॑नासु दु॒ष्टरं॑ च॒र्कृत्य॒मिन्द्र॑मिव चर्षणी॒सह॑म् ॥ (१०)
हे अश्चिनीकुमारो! तुमने पेदु को अनेक जनों द्वारा वांछित युद्ध में शत्रुओं को जीतने वाला, दीप्तिसंपन्न, समस्त कामों में बार-बार लगाने योग्य एवं इंद्र के समान शन्नुपराभवकारी सफेद घोड़ा दिया था. (१०)
O aschinikumaro! You gave Pedu a white horse to conquer the enemies in the war desired by many, glorious, worthy of repeated work in all the works, and as glorious as Indra. (10)