हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.119.3

मंडल 1 → सूक्त 119 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
सं यन्मि॒थः प॑स्पृधा॒नासो॒ अग्म॑त शु॒भे म॒खा अमि॑ता जा॒यवो॒ रणे॑ । यु॒वोरह॑ प्रव॒णे चे॑किते॒ रथो॒ यद॑श्विना॒ वह॑थः सू॒रिमा वर॑म् ॥ (३)
हे अश्चिनीकुमारो! यज्ञ करने वाले अगणित जयशील मनुष्य संग्राम में शोभन धनप्राप्ति के लिए स्पर्धा करते हुए जब मिलते हैं, तभी उत्तम धरती पर तुम्हारा रथ दिखाई देता है. तुम उसी रथ पर स्तोता के लिए धन लाते हो. (३)
O aschinikumaro! When the yajna-doers meet in the countless jaishil man's struggle to get wealth, your chariot appears on the best earth. You bring money for the hymn on the same chariot. (3)