हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.119.7

मंडल 1 → सूक्त 119 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
यु॒वं वन्द॑नं॒ निरृ॑तं जर॒ण्यया॒ रथं॒ न द॑स्रा कर॒णा समि॑न्वथः । क्षेत्रा॒दा विप्रं॑ जनथो विप॒न्यया॒ प्र वा॒मत्र॑ विध॒ते दं॒सना॑ भुवत् ॥ (७)
हे कुशल अश्विनीकुमारो! जैसे शिल्पी पुराने रथ को नया कर देता है, उसी प्रकार तुमने बुढ़ापे से ग्रस्त वंदन ऋषि को दुबारा युवा बना दिया था. गर्भस्थ कामदेव की स्तुति से प्रसन्न होकर तुमने उस मेधावी को माता के उदर से बाहर निकाला. तुम्हारा वही रक्षाकर्म सेवा करने वाले यजमान को प्राप्त हो. (७)
O kushal Ashwinikumaro! Just as the shilpi renews the old chariot, so you made the old age-ridden vandan sage young again. Pleased with the praise of the pregnant Cupid, you brought that genius out of the mother's womb. May your defense be received by the serving host. (7)