ऋग्वेद (मंडल 1)
अ॒श्विनो॑रसनं॒ रथ॑मन॒श्वं वा॒जिनी॑वतोः । तेना॒हं भूरि॑ चाकन ॥ (१०)
मैंने अन्नदाता अश्विनीकुमारों का अश्वरहित रथ पाया है. मैं उससे विपुल धन की कामना करता हूं. (१०)
I have found the horseless chariot of the Annadata Ashwinikumars. I wish him rich riches. (10)