ऋग्वेद (मंडल 1)
पु॒रा यत्सूर॒स्तम॑सो॒ अपी॑ते॒स्तम॑द्रिवः फलि॒गं हे॒तिम॑स्य । शुष्ण॑स्य चि॒त्परि॑हितं॒ यदोजो॑ दि॒वस्परि॒ सुग्र॑थितं॒ तदादः॑ ॥ (१०)
हे वज्रधारक! प्राचीन काल में जब सूर्य अंधकार के साथ हुए संग्राम से निवृत्त हुए, उस समय तुमने मेघ का विनाश किया. सूर्य को आच्छादित करने एवं सूर्य में संलग्न होने वाले शुष्ण के बल को तुमने समाप्त कर दिया था. (१०)
O thunderbolt! In ancient times, when the sun retired from the battle with darkness, you destroyed the cloud. You eliminated the force of the shusht that covers the sun and attaches to the sun. (10)