हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.122.5

मंडल 1 → सूक्त 122 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 122
आ वो॑ रुव॒ण्युमौ॑शि॒जो हु॒वध्यै॒ घोषे॑व॒ शंस॒मर्जु॑नस्य॒ नंशे॑ । प्र वः॑ पू॒ष्णे दा॒वन॒ आँ अच्छा॑ वोचेय व॒सुता॑तिम॒ग्नेः ॥ (५)
हे देवगण! उषिज का पुत्र मैं कक्षीवान्‌ आपको बुलाने के लिए आपके अनुकूल स्तोत्र का पाठ करता हूं. हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार ब्रह्मवादिनी महिला घोषा ने अपने श्वेत कुष्ठ रोग के विनाश के लिए तुम्हारी स्तुति की थी, उसी प्रकार मैं भी तुम्हारी स्तुति करता हूं. मैं फल देने वाले पूषा एवं धन देने वाले अग्नि की स्तुति करता हूं. (५)
O Gods! Son of Ushij, I recite a hymn suited to you to call you to The Kambivan. O Ashwinikumaro! Just as the Brahmavadini Mahila Ghosha praised you for the destruction of her white leprosy, so too do I praise you. I praise the fruit-giving god and the fire that gives money. (5)