हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.122.6

मंडल 1 → सूक्त 122 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 122
श्रु॒तं मे॑ मित्रावरुणा॒ हवे॒मोत श्रु॑तं॒ सद॑ने वि॒श्वतः॑ सीम् । श्रोतु॑ नः॒ श्रोतु॑रातिः सु॒श्रोतुः॑ सु॒क्षेत्रा॒ सिन्धु॑र॒द्भिः ॥ (६)
हे मित्र और वरुण! मेरे आह्वान के साथ-साथ यज्ञमंडप में वर्तमान अन्य लोगों का भी आह्वान सुनो. हमारे आह्वान को भली प्रकार सुनने वाले जलदेवता सिंधु हमारे फसलों वाले खेतों को जल से सींचते हुए हमारी स्तुति सुनें. (६)
Hey friend and Varun! Listen to my call as well as the call of others present in the yagnamandapa. Listen to our praises, the water god Sindhu, who listens to our call, watering our crops' fields with water. (6)