ऋग्वेद (मंडल 1)
अ॒स्य स्तु॑षे॒ महि॑मघस्य॒ राधः॒ सचा॑ सनेम॒ नहु॑षः सु॒वीराः॑ । जनो॒ यः प॒ज्रेभ्यो॑ वा॒जिनी॑वा॒नश्वा॑वतो र॒थिनो॒ मह्यं॑ सू॒रिः ॥ (८)
मैं पवित्र धन वाले देवसमूह के धन की स्तुति करता हूं. वे कक्षीवान् के प्रिय व्यक्ति हैं. हम पुत्र-पौत्रादि के साथ मिलकर प्रेम से इस धन का उपभोग करें, मैं अंगिरा गोत्र वाले कक्षीवान् को प्रसन्नतापूर्वक अन्न, घोड़े और रथ देने वाले देवसमूह की स्तुति करता हूं. (८)
I praise the wealth of the god group of holy riches. They are the beloved people of the chamber. Let us, together with our sons and grandsons, consume this wealth with love, I praise the god group who gladly gave food, horses and chariots to the angivan, who had the Angira tribe. (8)