हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.123.3

मंडल 1 → सूक्त 123 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 123
यद॒द्य भा॒गं वि॒भजा॑सि॒ नृभ्य॒ उषो॑ देवि मर्त्य॒त्रा सु॑जाते । दे॒वो नो॒ अत्र॑ सवि॒ता दमू॑ना॒ अना॑गसो वोचति॒ सूर्या॑य ॥ (३)
हे सुजाता एवं मानवपालिका उषादेवी! तुम इस समय मनुष्यों के लिए अपने प्रकाश का जो अंश देती हो, उसीको हमें सविता देव प्रदान करें तथा हमारे यज्ञस्थल में सूर्य के आगमन के निमित्त हमें पापरहित कहकर अनुगृहीत करें. (३)
O Sujatha and the human palika Ushadevi! Give us the part of your light that you give to men at this time, and grant us the name of Savita Dev and call us sinless for the arrival of the sun in our yagnasthans. (3)