ऋग्वेद (मंडल 1)
पृ॒थू रथो॒ दक्षि॑णाया अयो॒ज्यैनं॑ दे॒वासो॑ अ॒मृता॑सो अस्थुः । कृ॒ष्णादुद॑स्थाद॒र्या॒३॒॑ विहा॑या॒श्चिकि॑त्सन्ती॒ मानु॑षाय॒ क्षया॑य ॥ (१)
अपने व्यापार में कुशल उषा देवी के रथ में घोड़े जोड़े गए. उस रथ में मरणरहित देवसमूह यज्ञ में जाने के लिए बैठ गया. पूजा के योग्य एवं विविध गमन वाली उषा काले रंग के अंधकार से उत्पन्न होती है एवं अंधकार निवारण रूपी चिकित्सा करती हुई मानवों के निवासस्थान की ओर आती है. (१)
Horses were added to the chariot of Usha Devi, who is skilled in her trade. In that chariot, the deadly devgroup sat down to go to the yagna. Usha, worthy of worship and having varied movement, originates from the darkness of black color and comes towards the abode of human beings, treating the darkness as a cure. (1)
ऋग्वेद (मंडल 1)
पूर्वा॒ विश्व॑स्मा॒द्भुव॑नादबोधि॒ जय॑न्ती॒ वाजं॑ बृह॒ती सनु॑त्री । उ॒च्चा व्य॑ख्यद्युव॒तिः पु॑न॒र्भूरोषा अ॑गन्प्रथ॒मा पू॒र्वहू॑तौ ॥ (२)
गमनशील प्रकाश द्वारा अंधकार पर विजय प्राप्त करने वाली, महती एवं विश्व को सुख देने वाली उषा समस्त प्राणियों से पहले जागती है. वह नित्य यौवना उषा पुनः पुनः उत्पन्न होती है. सारे संसार को देखती हुई वह हमारे एक बार बुलाने पर ही आ जाती है. (२)
Usha, who conquers darkness by the moving light, who has conquered darkness, gives joy to the world and awakens before all beings. That routine youthful usha is re-generated. Looking at the whole world, she comes only when we call once. (2)
ऋग्वेद (मंडल 1)
यद॒द्य भा॒गं वि॒भजा॑सि॒ नृभ्य॒ उषो॑ देवि मर्त्य॒त्रा सु॑जाते । दे॒वो नो॒ अत्र॑ सवि॒ता दमू॑ना॒ अना॑गसो वोचति॒ सूर्या॑य ॥ (३)
हे सुजाता एवं मानवपालिका उषादेवी! तुम इस समय मनुष्यों के लिए अपने प्रकाश का जो अंश देती हो, उसीको हमें सविता देव प्रदान करें तथा हमारे यज्ञस्थल में सूर्य के आगमन के निमित्त हमें पापरहित कहकर अनुगृहीत करें. (३)
O Sujatha and the human palika Ushadevi! Give us the part of your light that you give to men at this time, and grant us the name of Savita Dev and call us sinless for the arrival of the sun in our yagnasthans. (3)
ऋग्वेद (मंडल 1)
गृ॒हंगृ॑हमह॒ना या॒त्यच्छा॑ दि॒वेदि॑वे॒ अधि॒ नामा॒ दधा॑ना । सिषा॑सन्ती द्योत॒ना शश्व॒दागा॒दग्र॑मग्र॒मिद्भ॑जते॒ वसू॑नाम् ॥ (४)
भोग की इच्छा से युक्त एवं सारे संसार को प्रकाशित करती हुई उषा प्रतिदिन नम्र भाव से प्रत्येक घर की ओर आती है एवं इवि-रूप धन का श्रेष्ठ भाग स्वीकार कर लेती है. (४)
With a desire for enjoyment and illuminating the whole world, Usha comes to every house every day with humility and accepts the best part of the wealth. (4)
ऋग्वेद (मंडल 1)
भग॑स्य॒ स्वसा॒ वरु॑णस्य जा॒मिरुषः॑ सूनृते प्रथ॒मा ज॑रस्व । प॒श्चा स द॑घ्या॒ यो अ॒घस्य॑ धा॒ता जये॑म॒ तं दक्षि॑णया॒ रथे॑न ॥ (५)
हे उषा! तुम मनुष्यों की शोभन नेत्री हो. तुम आदित्य की स्वसा एवं अंधकार निवारक सविता की भगिनी तथा अन्य देवों की अपेक्षा श्रेष्ठ हो. समस्त देव तुम्हारी स्तुति करें. तुम्हारी प्रसन्नता के पश्चात् जो दुःख देने वाला आएगा, हम तुम्हारी सहायता प्राप्त करके उसे अपने रथ आदि साधन से जीत लेंगे. (५)
Oh, Usha! You are the brave leader of human beings. You are superior to Aditya's sister and other gods, savita's sister and other gods. May all gods praise you. After your happiness, the one who grieves will come, we will receive your help and conquer it with our chariot, etc. (5)
ऋग्वेद (मंडल 1)
उदी॑रतां सू॒नृता॒ उत्पुरं॑धी॒रुद॒ग्नयः॑ शुशुचा॒नासो॑ अस्थुः । स्पा॒र्हा वसू॑नि॒ तम॒साप॑गूळ्हा॒विष्कृ॑ण्वन्त्यु॒षसो॑ विभा॒तीः ॥ (६)
हे ऋत्विजो! प्रिय एवं सच्ची बातें स्तुति रूप में कहो, बुद्धि का प्रमाण देने वाले यज्ञकर्म करो तथा दीप्तिशाली अग्नि प्रज्वलित करो. ऐसा करने से विविध प्रकाश वाली उषा अंधकार से ढके हुए एवं यज्ञसाधन धनों को प्रकट करती है. (६)
Hey Ritvijo! Say dear and true things in praise, do the yajna karma that proves wisdom and ignite a glorious fire. By doing so, Usha with diverse light reveals the darkness-covered and sacrificial wealth. (6)
ऋग्वेद (मंडल 1)
अपा॒न्यदेत्य॒भ्य१॒॑न्यदे॑ति॒ विषु॑रूपे॒ अह॑नी॒ सं च॑रेते । प॒रि॒क्षितो॒स्तमो॑ अ॒न्या गुहा॑क॒रद्यौ॑दु॒षाः शोशु॑चता॒ रथे॑न ॥ (७)
नाना रूपवान् अहोरात्र-दोनों देवता व्यवधान रहित होकर चलते हैं. वे एक-दूसरे के विरुद्ध गति वाले हैं. एक आता है तो दूसरा जाता है. बारीबारी से आने वाले इन देवताओं में एक पदार्थो को छिपाते हैं और दूसरे अपने अत्यंत प्रकाशवान् रथ के द्वारा उन्हें प्रकाशित करते हैं. (७)
Nana Rupvan Ahoratra - Both the deities walk without interruption. They are moving against each other. One comes and the other goes. In these deities who come from Baribari, one hides the substances and the others light them up through their extremely bright chariots. (7)
ऋग्वेद (मंडल 1)
स॒दृशी॑र॒द्य स॒दृशी॒रिदु॒ श्वो दी॒र्घं स॑चन्ते॒ वरु॑णस्य॒ धाम॑ । अ॒न॒व॒द्यास्त्रिं॒शतं॒ योज॑ना॒न्येकै॑का॒ क्रतुं॒ परि॑ यन्ति स॒द्यः ॥ (८)
उषा आज जितनी सुंदर है, उसी के समान कल भी सुंदर होगी. सूर्य जहां रहता है, उषा प्रतिदिन उससे तीस योजन आगे रहती है. एक ही उषा सूर्य के उदयकाल में आने और जाने का—दोनों कार्य करती है. (८)
Tomorrow , Usha (Morning) will be as beautiful as she is today. Usha is thirty yojans (12.8 kilometers) ahead of Sun every day. The same Usha performs both the work of coming and going in the rising time of the sun. (8)