हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.123.5

मंडल 1 → सूक्त 123 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 123
भग॑स्य॒ स्वसा॒ वरु॑णस्य जा॒मिरुषः॑ सूनृते प्रथ॒मा ज॑रस्व । प॒श्चा स द॑घ्या॒ यो अ॒घस्य॑ धा॒ता जये॑म॒ तं दक्षि॑णया॒ रथे॑न ॥ (५)
हे उषा! तुम मनुष्यों की शोभन नेत्री हो. तुम आदित्य की स्वसा एवं अंधकार निवारक सविता की भगिनी तथा अन्य देवों की अपेक्षा श्रेष्ठ हो. समस्त देव तुम्हारी स्तुति करें. तुम्हारी प्रसन्नता के पश्चात्‌ जो दुःख देने वाला आएगा, हम तुम्हारी सहायता प्राप्त करके उसे अपने रथ आदि साधन से जीत लेंगे. (५)
Oh, Usha! You are the brave leader of human beings. You are superior to Aditya's sister and other gods, savita's sister and other gods. May all gods praise you. After your happiness, the one who grieves will come, we will receive your help and conquer it with our chariot, etc. (5)