ऋग्वेद (मंडल 1)
अपा॒न्यदेत्य॒भ्य१॒॑न्यदे॑ति॒ विषु॑रूपे॒ अह॑नी॒ सं च॑रेते । प॒रि॒क्षितो॒स्तमो॑ अ॒न्या गुहा॑क॒रद्यौ॑दु॒षाः शोशु॑चता॒ रथे॑न ॥ (७)
नाना रूपवान् अहोरात्र-दोनों देवता व्यवधान रहित होकर चलते हैं. वे एक-दूसरे के विरुद्ध गति वाले हैं. एक आता है तो दूसरा जाता है. बारीबारी से आने वाले इन देवताओं में एक पदार्थो को छिपाते हैं और दूसरे अपने अत्यंत प्रकाशवान् रथ के द्वारा उन्हें प्रकाशित करते हैं. (७)
Nana Rupvan Ahoratra - Both the deities walk without interruption. They are moving against each other. One comes and the other goes. In these deities who come from Baribari, one hides the substances and the others light them up through their extremely bright chariots. (7)