हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.126.6

मंडल 1 → सूक्त 126 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 126
आग॑धिता॒ परि॑गधिता॒ या क॑शी॒केव॒ जङ्ग॑हे । ददा॑ति॒ मह्यं॒ यादु॑री॒ याशू॑नां भो॒ज्या॑ श॒ता ॥ (६)
भावयव्य ने अपनी पत्नी लोमशा को लक्ष्य करके कहा-“जिस प्रकार नकुली अपने पति से चिपटी रहती है उसी प्रकार यह संभोग-योग्य युवती आलिंगन करने के पश्चात्‌ चिरकाल रमण करती है. यह रेतोयुक्त रमणी मुझे सैकड़ों भोग प्रदान करती है.” (६)
Bhavyavya targeted his wife, Lomasha, and said, "Just as Nakuli clings to her husband, so this sexually-worthy young woman enjoys forever after embracing her. This sandy delightfully gives me hundreds of bhog." (6)