हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.133.4

मंडल 1 → सूक्त 133 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 133
यासां॑ ति॒स्रः प॑ञ्चा॒शतो॑ऽभिव्ल॒ङ्गैर॒पाव॑पः । तत्सु ते॑ मनायति त॒कत्सु ते॑ मनायति ॥ (४)
हे इंद्र! तुमने एक सौ पचास शत्रु सेनाओं का विनाश किया. लोग इस काम को बड़ा कहते हैं, पर तुम्हारे लिए यह छोटा है. (४)
O Indra! You have destroyed one hundred and fifty enemy armies. People call this work big, but for you it's small. (4)