हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.134.3

मंडल 1 → सूक्त 134 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 134
वा॒युर्यु॑ङ्क्ते॒ रोहि॑ता वा॒युर॑रु॒णा वा॒यू रथे॑ अजि॒रा धु॒रि वोळ्ह॑वे॒ वहि॑ष्ठा धु॒रि वोळ्ह॑वे । प्र बो॑धया॒ पुरं॑धिं जा॒र आ स॑स॒तीमि॑व । प्र च॑क्षय॒ रोद॑सी वासयो॒षसः॒ श्रव॑से वासयो॒षसः॑ ॥ (३)
वायु भार ढोने के लिए रथ के अग्रभाग में लाल रंग के घोड़े जोड़ते हैं. वे अत्यंत गमनशील एवं बोझा ढोने में समर्थ हैं. जार जिस प्रकार तंद्रा में पड़ी नारी को जगा देता है, उसी प्रकार तुम यज्ञकर्ता यजमान को हव्यदान के लिए सावधान कर देते हो. धरती और आकाश को प्रकाशित करके तुम हव्य प्राप्ति के लिए उषाकाल को स्थापित करते हो. (३)
Red colored horses are added to the front of the chariot to carry the air load. They are extremely moving and capable of carrying loads. Just as the jar awakens the woman lying in the sleep, so you warn the yajnakar host for the havan. By illuminating the earth and the sky, you establish the ushakaal for attaining the auspiciousness. (3)