हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.138.3

मंडल 1 → सूक्त 138 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 138
यस्य॑ ते पूषन्स॒ख्ये वि॑प॒न्यवः॒ क्रत्वा॑ चि॒त्सन्तोऽव॑सा बुभुज्रि॒र इति॒ क्रत्वा॑ बुभुज्रि॒रे । तामनु॑ त्वा॒ नवी॑यसीं नि॒युतं॑ रा॒य ई॑महे । अहे॑ळमान उरुशंस॒ सरी॑ भव॒ वाजे॑वाजे॒ सरी॑ भव ॥ (३)
हे पूषा! यजमान तुम्हारी मित्रता प्राप्त करके उत्तम यजञों द्वारा तुम्हें प्रसन्न करते हैं एवं स्तोत्र बोलते हुए तुम्हारी रक्षा प्राप्त करके भांति-भांति के सुख भोगते हैं. तुमसे नवीन रक्षण प्राप्त करने के बाद हम तुमसे नियुत धन की याचना करते हैं. हे पूषा! बहुत से लोग तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम हमारे प्रति दयालु बनकर आओ और युद्ध में हमारे आगे चलो. (३)
O God! Hosts please you by getting your friendship and enjoy a variety of pleasures by getting your protection while speaking hymns. After receiving new protection from you, we ask you for the money you have to spare. O God! Many people praise you. You come kind to us and walk ahead of us in the war. (3)