हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.142.9

मंडल 1 → सूक्त 142 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 142
शुचि॑र्दे॒वेष्वर्पि॑ता॒ होत्रा॑ म॒रुत्सु॒ भार॑ती । इळा॒ सर॑स्वती म॒ही ब॒र्हिः सी॑दन्तु य॒ज्ञियाः॑ ॥ (९)
शुचि, मरणरहित देवों की मध्यस्थ तथा यज्ञसंपादिका अग्नि की तीन मूर्तियां भारती, वाक्‌ और सरस्वती यज्ञ के उपयुक्त बनकर कुशों पर बैठे. (९)
The three idols of The Shuchi, the Mediator of the Godless and the Yajnasamedika Agni, sat on the Kushas, suitable for the Bharati, Vak and Saraswati Yajna. (9)