हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.15.3

मंडल 1 → सूक्त 15 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 15
अ॒भि य॒ज्ञं गृ॑णीहि नो॒ ग्नावो॒ नेष्टः॒ पिब॑ ऋ॒तुना॑ । त्वं हि र॑त्न॒धा असि॑ ॥ (३)
हे पत्नीयुक्त त्वष्टा! हमारे यज्ञ की प्रशंसा करो एवं ऋत के साथ सोम पिओ. तुम रत्नदाता हो. (३)
O wifely soul! Praise our yajna and drink som with rit. You are a gemstone. (3)