हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.151.3

मंडल 1 → सूक्त 151 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 151
आ वां॑ भूषन्क्षि॒तयो॒ जन्म॒ रोद॑स्योः प्र॒वाच्यं॑ वृषणा॒ दक्ष॑से म॒हे । यदी॑मृ॒ताय॒ भर॑थो॒ यदर्व॑ते॒ प्र होत्र॑या॒ शिम्या॑ वीथो अध्व॒रम् ॥ (३)
हे कामवर्षक मित्र और वरुण! यजमान समस्त शक्तियां पाने के उद्देश्य से धरती और आकाश में आपके स्तुति योग्य जन्म की प्रशंसा करते हैं. तुम अपने पूजक यजमान को अभीष्ट फल देते हो एवं स्तुतिवचन तथा हव्यदान आदि कर्मो को स्वीकार करते हो. (३)
O workman friend and Varun! Hosts praise your praiseworthy birth in the earth and sky in order to gain all the powers. You give the desired fruits to your godly host and accept the deeds of praise and greetings, etc. (3)