हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.155.4

मंडल 1 → सूक्त 155 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 155
तत्त॒दिद॑स्य॒ पौंस्यं॑ गृणीमसी॒नस्य॑ त्रा॒तुर॑वृ॒कस्य॑ मी॒ळ्हुषः॑ । यः पार्थि॑वानि त्रि॒भिरिद्विगा॑मभिरु॒रु क्रमि॑ष्टोरुगा॒याय॑ जी॒वसे॑ ॥ (४)
हम सबके स्वामी, पालक, हिंसक एवं नित्य तरुण विष्णु के पराक्रमों की स्तुति करते हैं. उन्होंने तीनों लोकों की प्रशंसनीय रक्षा के लिए तीन चरण रखकर पृथ्वी आदि समस्त लोकों की परिक्रमा कर ली थी. (४)
We all praise the mighty of lord, guardian, violent and eternal young Vishnu. He had circumnavigated all the realms of the earth, etc., by placing three steps for the admirable defense of the three realms. (4)