ऋग्वेद (मंडल 1)
यदक्र॑न्दः प्रथ॒मं जाय॑मान उ॒द्यन्स॑मु॒द्रादु॒त वा॒ पुरी॑षात् । श्ये॒नस्य॑ प॒क्षा ह॑रि॒णस्य॑ बा॒हू उ॑प॒स्तुत्यं॒ महि॑ जा॒तं ते॑ अर्वन् ॥ (१)
हे अश्व! तुम्हारा जन्म इस योग्य है कि सब लोग मिलकर तुम्हारी स्तुति करें, क्योंकि तुम सर्वप्रथम जल से उत्पन्न हुए थे एवं यजमान पर अनुकंपा करने के लिए तुम महान् शब्द करते हो. तुम्हारे पंख बाज के एवं पैर हरिण के समान हैं. (१)
Oh, horse! Your birth is worthy that all people together praise you, for you were first born of water and you make great words to have compassion on the host. Your wings are like hawks and feet are like deer. (1)
ऋग्वेद (मंडल 1)
य॒मेन॑ द॒त्तं त्रि॒त ए॑नमायुन॒गिन्द्र॑ एणं प्रथ॒मो अध्य॑तिष्ठत् । ग॒न्ध॒र्वो अ॑स्य रश॒नाम॑गृभ्णा॒त्सूरा॒दश्वं॑ वसवो॒ निर॑तष्ट ॥ (२)
नियामक अग्नि के दिए हुए अश्व को पृथ्वी आदि तीन स्थानों में वर्तमान वायु ने रथ में जोड़ा. इस रथ पर सबसे पहले इंद्र सवार हुए एवं गंधर्वो ने उसकी लगाम को पकड़ा. वसुओं ने सूर्य से अश्च को प्राप्त किया. (२)
The horse given by the regulator fire was added to the chariot by the present air in three places like earth etc. Indra was the first to ride on this chariot and Gandharvo grabbed his reins. The vasus received ash from the sun. (2)
ऋग्वेद (मंडल 1)
असि॑ य॒मो अस्या॑दि॒त्यो अ॑र्व॒न्नसि॑ त्रि॒तो गुह्ये॑न व्र॒तेन॑ । असि॒ सोमे॑न स॒मया॒ विपृ॑क्त आ॒हुस्ते॒ त्रीणि॑ दि॒वि बन्ध॑नानि ॥ (३)
हे अश्व! तुम यम, आदित्य एवं तीन स्थानों में व्याप्त गोपनीय व्रतधारी वायु हो. तुम सोम से मिले हो. पुराविद् कहते हैं कि स्वर्ग में तुम्हारे तीन उत्पत्ति स्थान हैं. (३)
Oh, horse! You are Yama, Aditya and the secret fasting air in the three places. You've met Mon. The archaeologists say that you have three genesis places in heaven. (3)
ऋग्वेद (मंडल 1)
त्रीणि॑ त आहुर्दि॒वि बन्ध॑नानि॒ त्रीण्य॒प्सु त्रीण्य॒न्तः स॑मु॒द्रे । उ॒तेव॑ मे॒ वरु॑णश्छन्त्स्यर्व॒न्यत्रा॑ त आ॒हुः प॑र॒मं ज॒नित्र॑म् ॥ (४)
हे अश्व! स्वर्ग, जल एवं समुद्र में तुम्हारे तीनतीन बंधन स्थान हैं. तुम वरुण हो. पुराविद् तुम्हारे जो जन्मस्थान निश्चित कर चुके हैं, उन्हें मैं बताता हूं. (४)
Oh, horse! You have three bonding places in heaven, water and sea. You are Varun. I tell you the places of your birth that the archaeologists have fixed. (4)
ऋग्वेद (मंडल 1)
इ॒मा ते॑ वाजिन्नव॒मार्ज॑नानी॒मा श॒फानां॑ सनि॒तुर्नि॒धाना॑ । अत्रा॑ ते भ॒द्रा र॑श॒ना अ॑पश्यमृ॒तस्य॒ या अ॑भि॒रक्ष॑न्ति गो॒पाः ॥ (५)
हे अश्व! मैंने जिन स्वर्ग आदि का वर्णन किया है, वे तुम्हारे जन्मस्थान एवं संचरण स्थल हैं. यज्ञ की रक्षा करने वाली तुम्हारी कल्याणकारी लगाम को भी मैंने वहीं देखा है. (५)
Oh, horse! The heavens, etc. that I have described, are your birthplace and place of transmission. I have also seen your welfare rein protecting the yagna there. (5)
ऋग्वेद (मंडल 1)
आ॒त्मानं॑ ते॒ मन॑सा॒राद॑जानाम॒वो दि॒वा प॒तय॑न्तं पतं॒गम् । शिरो॑ अपश्यं प॒थिभिः॑ सु॒गेभि॑ररे॒णुभि॒र्जेह॑मानं पत॒त्रि ॥ (६)
हे अश्व! मैं तुम्हारे दूरस्थित शरीर को अपने मन की कल्पना से जानता हूं. तुम धरती से अंतरिक्षस्थित सूर्य में जाते हो. धूलिरहित सुखप्रद मार्ग से शीघ्रतापूर्वक उठते हुए तुम्हारे सिर को भी मैंने देखा है. (६)
Oh, horse! I know your remote body from the imagination of your mind. You go from earth to the sun in space. I have also seen your head rising up quickly from the dustless, pleasant path. (6)
ऋग्वेद (मंडल 1)
अत्रा॑ ते रू॒पमु॑त्त॒मम॑पश्यं॒ जिगी॑षमाणमि॒ष आ प॒दे गोः । य॒दा ते॒ मर्तो॒ अनु॒ भोग॒मान॒ळादिद्ग्रसि॑ष्ठ॒ ओष॑धीरजीगः ॥ (७)
हे अश्व! मैंने धरती पर चारों ओर अन्नग्रहण के निमित्त आते हुए तुम्हारे रूप को देखा है. जिस समय मनुष्य तुम्हारे खाने की वस्तुएं लेकर जाते हैं, उस समय तुम कृपा करके घास आदि तिनकों को खाते हो. (७)
Oh, horse! I have seen your appearance coming around on the earth for the sake of the adoption of food. At the time when men take away your food items, you kindly eat grass, etc. straws. (7)
ऋग्वेद (मंडल 1)
अनु॑ त्वा॒ रथो॒ अनु॒ मर्यो॑ अर्व॒न्ननु॒ गावोऽनु॒ भगः॑ क॒नीना॑म् । अनु॒ व्राता॑स॒स्तव॑ स॒ख्यमी॑यु॒रनु॑ दे॒वा म॑मिरे वी॒र्यं॑ ते ॥ (८)
हे अश्व! रथ, मनुष्य, गाएं एवं नारियों के सौभाग्य तुम्हारे पीछे चलते हैं, अन्य अश्व तुम्हारे पीछे चलकर तुम्हारी मित्रता प्राप्त कर चुके हैं. ऋत्विज् तुम्हारे शौर्यकर्मो की स्तुति करके प्रसन्न होते हैं. (८)
Oh, horse! The good fortunes of chariots, men, cows and women follow you, other horses have followed you and found your friendship. Ritwiz is pleased to praise your bravery deeds. (8)