हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.164.16

मंडल 1 → सूक्त 164 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 164
स्त्रियः॑ स॒तीस्ताँ उ॑ मे पुं॒स आ॑हुः॒ पश्य॑दक्ष॒ण्वान्न वि चे॑तद॒न्धः । क॒विर्यः पु॒त्रः स ई॒मा चि॑केत॒ यस्ता वि॑जा॒नात्स पि॒तुष्पि॒तास॑त् ॥ (१६)
किरणे स्त्रियां होती हुई भी पुरुष हैं. उन्हें केवल आंखों वाला ही देख सकता है, अंधा नहीं. जो क्रांतदर्शी हैं, वे ही यह बात जानते हैं. उन किरणों को जानने वाला पिता का भी पिता है. (१६)
The rays are women, but they are men. Only those with eyes can see them, not blind. Only those who are revolutionaries know this. The one who knows those rays is also the father of the father. (16)