हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.164.23

मंडल 1 → सूक्त 164 → श्लोक 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 164
यद्गा॑य॒त्रे अधि॑ गाय॒त्रमाहि॑तं॒ त्रैष्टु॑भाद्वा॒ त्रैष्टु॑भं नि॒रत॑क्षत । यद्वा॒ जग॒ज्जग॒त्याहि॑तं प॒दं य इत्तद्वि॒दुस्ते अ॑मृत॒त्वमा॑नशुः ॥ (२३)
जो धरती पर अग्नि का स्थान जानते हैं, जो देवों द्वारा अंतरिक्ष से वायु की उत्पत्ति से परिचित हैं अथवा जो यह समझते हैं कि उस पर सूर्य का स्थान है, वे ही मरणरहित पद को पाते हैं. (२३)
Those who know the place of fire on the earth, who are familiar with the origin of the air from space by the gods, or who understand that the sun has a place on it, they find the position without death. (23)