ऋग्वेद (मंडल 1)
उप॑ ह्वये सु॒दुघां॑ धे॒नुमे॒तां सु॒हस्तो॑ गो॒धुगु॒त दो॑हदेनाम् । श्रेष्ठं॑ स॒वं स॑वि॒ता सा॑विषन्नो॒ऽभी॑द्धो घ॒र्मस्तदु॒ षु प्र वो॑चम् ॥ (२६)
मैं इस दुधारू गाय को बुलाता हूं. दोहनकुशल ग्वाला उसे दुहता है. हमारे सोमरस के उत्तम भाग को सूर्य स्वीकार करें. उससे उनका तेज बढ़ेगा. इसी हेतु मैं उन्हें बुलाता हूं. (२६)
I call this milch cow. The harnessable gwala milks him. Accept the sun to the best part of our somras. This will increase their speed. That's why I call them. (26)