ऋग्वेद (मंडल 1)
ए॒वेदे॒ते प्रति॑ मा॒ रोच॑माना॒ अने॑द्यः॒ श्रव॒ एषो॒ दधा॑नाः । सं॒चक्ष्या॑ मरुतश्च॒न्द्रव॑र्णा॒ अच्छा॑न्त मे छ॒दया॑था च नू॒नम् ॥ (१२)
हे सुनहरे रंग वाले मरुतो! तुमने मेरे प्रति प्रसन्न होकर और प्रशंसनीय यश एवं अन्न धारण करते हुए मुझे भली प्रकार चारों ओर से ढक लिया है. तुम निश्चित रूप से मुझे ढको.” (१२)
O golden colored Maruto! You have covered me well around, pleased with me and wearing admirable fame and food. You definitely cover me up." (12)