हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.165.5

मंडल 1 → सूक्त 165 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 165
अतो॑ व॒यम॑न्त॒मेभि॑र्युजा॒नाः स्वक्ष॑त्रेभिस्त॒न्व१॒ः॑ शुम्भ॑मानाः । महो॑भि॒रेता॒ँ उप॑ युज्महे॒ न्विन्द्र॑ स्व॒धामनु॒ हि नो॑ ब॒भूथ॑ ॥ (५)
मरुद्गण बोले-“इसी कारण हम अपने शरीरों को महान्‌ तेज से चमकाते हुए समीपवर्ती एवं विशाल बल वाले अश्चों के साथ इस महान्‌ यज्ञ में आने को तैयार हुए हैं. हे इंद्र! हमारे बल का अनुभव करते हुए तुम भी हमारे साथ रहो.” (५)
The deserts said, "That is why we are ready to come to this great yagna with the nearby and huge-strong asas, shining our bodies with great brightness. O Indra! Be with us while experiencing our strength." (5)