हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.166.12

मंडल 1 → सूक्त 166 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 166
तद्वः॑ सुजाता मरुतो महित्व॒नं दी॒र्घं वो॑ दा॒त्रमदि॑तेरिव व्र॒तम् । इन्द्र॑श्च॒न त्यज॑सा॒ वि ह्रु॑णाति॒ तज्जना॑य॒ यस्मै॑ सु॒कृते॒ अरा॑ध्वम् ॥ (१२)
हे शोभन जन्म वाले मरुतो! तुम्हारा महत्त्व एवं दान अदिति के व्रत के समान अविच्छिन्न है. तुम जिस पुण्यशील यजमान के लिए इष्ट धन देते हो, उसके प्रति इंद्र भी कुटिलता नहीं करते. (१२)
O You born of adornment, Maruto! Your importance and charity are as unsavoury as Aditi's fast. Indra also does not deviate towards the virtuous host for which you give the favoured wealth. (12)