हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.166.13

मंडल 1 → सूक्त 166 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 166
तद्वो॑ जामि॒त्वं म॑रुतः॒ परे॑ यु॒गे पु॒रू यच्छंस॑ममृतास॒ आव॑त । अ॒या धि॒या मन॑वे श्रु॒ष्टिमाव्या॑ सा॒कं नरो॑ दं॒सनै॒रा चि॑कित्रिरे ॥ (१३)
हे मरुद्गण! हमारे प्रति तुम्हारी प्रसिद्ध मैत्री अतीत काल में भी थी. तुम लोग हमारी स्तुतियों की भली-भांति रक्षा करते हो एवं श्रद्धालु यजमान के यज्ञ के नेता बनकर उसके मन की बात जान लेते हो. (१३)
O deserters! Your famous friendship towards us was there in the past too. You protect our praises well and you know the mind of the devout host by becoming the leader of the yagna. (13)