ऋग्वेद (मंडल 1)
विश्वा॑नि भ॒द्रा म॑रुतो॒ रथे॑षु वो मिथ॒स्पृध्ये॑व तवि॒षाण्याहि॑ता । अंसे॒ष्वा वः॒ प्रप॑थेषु खा॒दयोऽक्षो॑ वश्च॒क्रा स॒मया॒ वि वा॑वृते ॥ (९)
हे मरुद्गण! तुम्हारे रथों पर समस्त कल्याणकारी वस्तुएं रखी हुई हैं. तुम्हारी भुजाओं में एक से एक शक्तिशाली शस्त्र वर्तमान हैं. सभी विश्राम स्थानों पर तुम्हारे लिए खाने की वस्तुएं उपस्थित हैं. तुम्हारे रथों के पहिए धुरियों के साथ घूमते हैं. (९)
O deserters! All the welfare items are placed on your chariots. Your arms are present one by one powerful weapons. All resting places have food items for you. The wheels of your chariots rotate with the axles. (9)