ऋग्वेद (मंडल 1)
प्रति॑ ष्टोभन्ति॒ सिन्ध॑वः प॒विभ्यो॒ यद॒भ्रियां॒ वाच॑मुदी॒रय॑न्ति । अव॑ स्मयन्त वि॒द्युतः॑ पृथि॒व्यां यदी॑ घृ॒तं म॒रुतः॑ प्रुष्णु॒वन्ति॑ ॥ (८)
जिस समय नीचे गिरने वाला जल चलता है, उस समय वज्र के शब्द के समान गर्जन करता है. जब मरुद्गण धरती पर जल बरसाते हैं, उस समय बिजली नीचे की ओर मुंह करके प्रकट हो जाती है. (८)
At the time when the water falling down moves, it roars like the word of the thunderbolt. When the deserts rain water on the earth, the electricity appears facing downwards. (8)