हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.174.7

मंडल 1 → सूक्त 174 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 174
रप॑त्क॒विरि॑न्द्रा॒र्कसा॑तौ॒ क्षां दा॒सायो॑प॒बर्ह॑णीं कः । कर॑त्ति॒स्रो म॒घवा॒ दानु॑चित्रा॒ नि दु॑र्यो॒णे कुय॑वाचं मृ॒धि श्रे॑त् ॥ (७)
हे इंद्र! अन्न प्राप्ति के निमित्त क्रांतदर्शी होता तुम्हारी स्तुति करता है. तुमने दास असुर का वध करके धरती को उसकी शस्या बनाया था. इंद्र ने तीन भूमियों का दानरूपी विचित्र कार्य करके दुर्योणि राजा के कल्याण के लिए कुयवाच को मारा था. (७)
O Indra! For the sake of getting food, the revolutionary is praising you. You killed the dasa Asura and made the earth his refuge. Indra had killed Kuyavach for the welfare of the Duryoni king by doing a bizarre act of charity of three lands. (7)