हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.177.2

मंडल 1 → सूक्त 177 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 177
ये ते॒ वृष॑णो वृष॒भास॑ इन्द्र ब्रह्म॒युजो॒ वृष॑रथासो॒ अत्याः॑ । ताँ आ ति॑ष्ठ॒ तेभि॒रा या॑ह्य॒र्वाङ्हवा॑महे त्वा सु॒त इ॑न्द्र॒ सोमे॑ ॥ (२)
हे इंद्र! तुम्हारे घोड़े तरुण, उत्तम, कामवर्षी, मंत्रयुक्त एवं रथ में जोड़ने योग्य हैं. तुम उन पर सवार होकर, उनके साथ हमारे सम्मुख आओ. (२)
O Indra! Your horses are young, excellent, lustful, spelly and worthy of being added to the chariot. Come before us with them, riding on them. (2)