हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.184.4

मंडल 1 → सूक्त 184 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 184
अ॒स्मे सा वां॑ माध्वी रा॒तिर॑स्तु॒ स्तोमं॑ हिनोतं मा॒न्यस्य॑ का॒रोः । अनु॒ यद्वां॑ श्रव॒स्या॑ सुदानू सु॒वीर्या॑य चर्ष॒णयो॒ मद॑न्ति ॥ (४)
हे मधुपूर्ण पात्र वाले अश्विनीकुमारो! मान्य स्तोता अगस्त्य की स्तुति सुनकर अपना प्रसिद्ध दान हमें दो. हे शोभनदानशीलो! अन्न की इच्छा से पुरोहित शक्तिशाली यजमान के कल्याण के लिए तुम्हारे साथ प्रसन्न हो. (४)
O Ashwinikumaro with a meek character! Give us your famous donation by listening to the praises of the valid hymn Agastya. O you who are sordid! May the priest be pleased with you for the welfare of the mighty host by the will of the food. (4)