हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.184.6

मंडल 1 → सूक्त 184 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 184
अता॑रिष्म॒ तम॑सस्पा॒रम॒स्य प्रति॑ वां॒ स्तोमो॑ अश्विनावधायि । एह या॑तं प॒थिभि॑र्देव॒यानै॑र्वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम् ॥ (६)
हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारी कृपा से हम अंधकार को पार करेंगे. इसीलिए तुम्हारे लिए ये स्तुतियां बनाई गई हैं. तुम देवों के मार्ग से यज्ञ में आओ, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त कर सकें. (६)
O Ashwinikumaro! By your grace we will overcome the darkness. That's why these praises have been made for you. You come to the yagna by the way of the gods, so that we may gain food, strength and long life. (6)