हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.185.9

मंडल 1 → सूक्त 185 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 185
उ॒भा शंसा॒ नर्या॒ माम॑विष्टामु॒भे मामू॒ती अव॑सा सचेताम् । भूरि॑ चिद॒र्यः सु॒दास्त॑राये॒षा मद॑न्त इषयेम देवाः ॥ (९)
स्तुति के योग्य एवं मानवों के हितकारी धरती और आकाश के प्रति की गई स्तुतियां मेरी रक्षा करें. उक्त दोनों रक्षक मेरी रक्षा के लिए मिलें. हे देवो! तुम्हारे स्तुतिकर्ता हम हव्य अन्न द्वारा तुम्हें संतुष्ट करते हैं एवं दान करने के लिए अन्न की अभिलाषा करते हैं. (९)
May the praises made to the earth and the heavens worthy of praise and beneficial to mankind protect me. The said two guards meet to protect me. Oh, God! Your praiseworthy, we satisfy you with the food you have and desire food to be donated. (9)