हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.188.5

मंडल 1 → सूक्त 188 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 188
वि॒राट् स॒म्राड्वि॒भ्वीः प्र॒भ्वीर्ब॒ह्वीश्च॒ भूय॑सीश्च॒ याः । दुरो॑ घृ॒तान्य॑क्षरन् ॥ (५)
यज्ञशाला में विराट्‌, सम्राट्‌, विप्र, प्रभु, बहु और भूयान्‌ अग्नि घृतरूप जल गिराते हैं. (५)
In the yajnashala, Virat, Emperor, Vipra, Lord, Daughter-in-law and Bhuyan agni abhrit form water. (5)