हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.22.12

मंडल 1 → सूक्त 22 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
इ॒हेन्द्रा॒णीमुप॑ ह्वये वरुणा॒नीं स्व॒स्तये॑ । अ॒ग्नायीं॒ सोम॑पीतये ॥ (१२)
हम अपने कल्याण के लिए एवं सोमपान करने के लिए इंद्रपत्नी, वरुणपत्नी एवं अग्निपत्नी को बुलाते हैं. (१२)
We call Indrapatti, Varuna wife and Agni-wife for our welfare and for doing sompan. (12)