हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.22.4

मंडल 1 → सूक्त 22 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
न॒हि वा॒मस्ति॑ दूर॒के यत्रा॒ रथे॑न॒ गच्छ॑थः । अश्वि॑ना सो॒मिनो॑ गृ॒हम् ॥ (४)
हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने रथ में बैठकर सोमरस पीने के लिए यजमान के जिस घर की दिशा में जा रहे हो, वह घर दूर नहीं है. (४)
O Ashwinikumaro! The house in which you are going to sit in your chariot and drink somras is not far away. (4)