ऋग्वेद (मंडल 1)
आपः॑ पृणी॒त भे॑ष॒जं वरू॑थं त॒न्वे॒३॒॑ मम॑ । ज्योक्च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे ॥ (२१)
हे जल! मेरे शरीर के लिए रोग नष्ट करने वाली ओषधियां पूर्ण करो. जिससे मैं बहुत समय तक सूर्य के दर्शन कर सकूं. (२१)
O water! Complete the disease-destroying drugs for my body. So that I can see the sun for a long time. (21)