ऋग्वेद (मंडल 1)
शुनः॒शेपो॒ ह्यह्व॑द्गृभी॒तस्त्रि॒ष्वा॑दि॒त्यं द्रु॑प॒देषु॑ ब॒द्धः । अवै॑नं॒ राजा॒ वरु॑णः ससृज्याद्वि॒द्वाँ अद॑ब्धो॒ वि मु॑मोक्तु॒ पाशा॑न् ॥ (१३)
लकड़ी के तीन यूपों से बंधे हुए शुनःशेप ने अदिति के पुत्र वरुण का आह्वान किया था, इसलिए विद्वान् एवं दयालु राजा वरुण ने शुनःशेप को बंधन से छुड़ा दिया था. (१३)
Shunshep, bound by three wooden yups, had invoked Varuna, the son of Aditi, so the learned and merciful king Varuna had freed Shunshep from bondage. (13)