हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.24.6

मंडल 1 → सूक्त 24 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 24
न॒हि ते॑ क्ष॒त्रं न सहो॒ न म॒न्युं वय॑श्च॒नामी प॒तय॑न्त आ॒पुः । नेमा आपो॑ अनिमि॒षं चर॑न्ती॒र्न ये वात॑स्य प्रमि॒नन्त्यभ्व॑म् ॥ (६)
हे वरुण देव! आकाश में उड़ने वाले पक्षियों में भी तुम्हारे समान शक्ति और पराक्रम नहीं है. इन्हें तुम्हारे बराबर क्रोध भी नहीं मिला है. सर्वदा चलने वाली वायु और बहने वाला जल तुम्हारी गति से आगे नहीं बढ़ सकता. (६)
O Varun Dev! The birds that fly in the sky do not have the same power and valour as you. They haven't even got the same anger as you. The ever-moving wind and the flowing water cannot move at your own pace. (6)