हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.25.14

मंडल 1 → सूक्त 25 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
न यं दिप्स॑न्ति दि॒प्सवो॒ न द्रुह्वा॑णो॒ जना॑नाम् । न दे॒वम॒भिमा॑तयः ॥ (१४)
हिंसा करने वाले लोग भयभीत होकर वरुण की शत्रुता छोड़ देते हैं. मनुष्यों को पीड़ा पहुंचाने वाले लोग उन्हें पीड़ा नहीं पहुंचाते. पाप करने वाले लोग उनके प्रति पाप का आचरण त्याग देते हैं. (१४)
Those who commit violence leave Varun's enmity in fear. Those who cause pain to humans do not cause them pain. Sinful people renounce the conduct of sin toward them. (14)